“ये तिरंगा अभी और ऊँचा उठेगा”
अस्सी साल की कहानी है,
बलिदानों की निशानी है,
1947 की उस सुबह से
आज की ये जवानी है।
कभी हाथों में बेड़ियाँ थीं,
आँखों में आज़ादी थी,
मिट्टी-मिट्टी में गूँज रही
भारत माँ की पुकार थी।
भगत सिंह की वो आग अभी भी
सीने में जलती है,
आज़ाद की वो हुंकार आज भी
रग-रग में पलती है।
बोस की आवाज़ हवा में है,
बिस्मिल की रवानी है,
हर अनजाने वीर की कुर्बानी
भारत की अमर कहानी है।
हमने शून्य से शिखर छुआ,
धरती से आकाश छुआ,
चाँद की मिट्टी तक जा पहुँचे,
अंतरिक्ष का विश्वास छुआ।
अब Gen Z की आँखों में
नए हिंदुस्तान का सपना है,
Gen Alpha के हाथों में
कल का पूरा अपना है।
किसी के हाथ में किताब है,
किसी के हाथ में विज्ञान,
किसी के सपनों में स्टार्टअप,
किसी की आँखों में आसमान।
ये भारत रुकने वाला नहीं,
ये भारत झुकने वाला नहीं,
जो दुनिया को राह दिखाएगा,
वो भारत थकने वाला नहीं।
लेकिन ऐ नौजवान, याद रखना—
ये आज़ादी मुफ्त नहीं आई,
किसी माँ ने बेटा खोया था,
किसी बहन ने राखी गँवाई थी।
किसी ने फाँसी को चूमा था,
किसी ने गोली सीने पर खाई,
तब जाकर इस धरती ने
आजादी की सुबह पाई।
इसलिए तिरंगा जब लहराना,
सिर्फ़ तस्वीर मत बनाना,
इसके तीन रंगों की कसम लेकर
भारत को और महान बनाना।
जहाँ नफरत हार जाए,
जहाँ इंसानियत जीत जाए,
जहाँ मेहनत की कीमत हो,
जहाँ हर बच्चा पढ़ पाए।
जहाँ सैनिक का सम्मान रहे,
जहाँ किसान का मान रहे,
जहाँ बेटियों की उड़ान रहे,
जहाँ भारत की पहचान रहे।
अस्सी साल हुए हैं लेकिन
कहानी अभी अधूरी है,
मंजिल सामने खड़ी हुई है,
बस मेहनत थोड़ी जरूरी है।
हम वो पीढ़ी बन जाएँगे
जिस पर भारत गर्व करेगा,
जिस दिन दुनिया के नक्शे पर
भारत सबसे आगे होगा।
ये तिरंगा अभी और ऊँचा उठेगा,
ये हिंदुस्तान अभी और आगे बढ़ेगा।
शहीदों का सपना अभी जिंदा है,
भारत का जुनून अभी जिंदा है।
वतन था, वतन है, वतन रहेगा—
भारत माँ का नाम सदा ऊँचा रहेगा।
जय हिंद!
वंदे मातरम्!
– अतुल कुमार गुप्ता















