अस्सी साल की कहानी है,बलिदानों की निशानी है,1947 की उस सुबह सेआज की ये जवानी है। कभी हाथों में बेड़ियाँ थीं,आँखों में आज़ादी थी,मिट्टी-मिट्टी में गूँज रहीभारत माँ की पुकार थी। भगत सिंह की वो आग अभी भीसीने में जलती है,आज़ाद की वो हुंकार आज भीरग-रग में पलती है। बोस की आवाज़ हवा में है,बिस्मिल
















