अस्सी साल की कहानी है,बलिदानों की निशानी है,1947 की उस सुबह सेआज की ये जवानी है। कभी हाथों में बेड़ियाँ थीं,आँखों में आज़ादी थी,मिट्टी-मिट्टी में गूँज रहीभारत माँ की पुकार थी। भगत सिंह की वो आग अभी भीसीने में जलती है,आज़ाद की वो हुंकार आज भीरग-रग में पलती है। बोस की आवाज़ हवा में है,बिस्मिल
अंधेरों को जैसेरोशनी का इंतजार है।नफरत को जैसेमोहब्बत का इंतजार है।बादलों को जैसेबरसने का इंतजार है।राहों को जैसेहमराही का इंतजार है।वृक्षों को जैसेखिलते हुए पत्तों का इंतजार है।सूखी भूमि को जैसेवर्षा का इंतजार है।सावन को जैसेबहारों का इंतजार है।वैसे मुझे तुम्हारामेरे जीवन में इंतजार है। डॉ.राजीव डोगराकांगड़ा हिमाचल प्रदेश (युवा कवि लेखक)(हिंदी अध्यापक)
कांगड़ा, हिमाचल प्रदेश। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के युवा कवि, लेखक एवं हिंदी अध्यापक डॉ. राजीव डोगरा को अमेरिका के कैलिफोर्निया से अंतरराष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुआ है। विश्व शांति दिवस के अवसर पर इंटरनेशनल ओपन यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूमैनिटी हेल्थ साइंस एंड पीस (कैलिफोर्निया, अमेरिका) ने उन्हें “सम्मान पत्र” प्रदान कर सम्मानित किया। कई अंतरराष्ट्रीय […]
जल ने प्रलय मचा रखी हैआसमाँ की मोहब्बत मेंदुनिया तबाह कर रखी है। सोचते हो मोहब्बतबस तुमने ही की है यहाँओह नहीं नहीं…… हवा ने पानी सेपानी ने हवा सेआंखों से आंखें मिला रखी है। सोचते हो खूबसूरतबस तुम ही हो यहांओह नहीं नहीं…… पर्वतों ने अपनी सुंदरता सेसारी दुनिया अपनेकदमों में झुका रखी है। […]



















