संकट के दौर में मोदी की राष्ट्रहित अपील: सोना छोड़ें, ईंधन बचाएं, स्वदेशी अपनाएं
मोदी की सामयिक अपील राष्ट्रहित में
• ऊर्जा को बचाने के लिए वर्क फ्रॉम होम की अपील।
• एक साल तक सोना न खरीदें ताकि सोने के आयात में खर्च होने वाली विदेशी मुद्रा को बचाया जा सके।
• ईंधन की भारी महंगाई के कारण वाहन का कम इस्तेमाल करें, मेट्रो का उपयोग करें और कारपूलिंग को बढ़ावा दें।
• हर परिवार से खाद्य तेल की खपत में कटौती की अपील ताकि देश की आर्थिक स्थिति मजबूत हो सके।
• किसान रासायनिक उर्वरक पर निर्भरता कम करें और प्राकृतिक खेती अपनाएं।
• विदेशी वस्तुओं की जगह स्वदेशी उत्पादों को दें प्राथमिकता।
• विदेश यात्रा टालें जिससे विदेशी मुद्रा की बचत हो।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गत 10 मई को जनता से जो अपील की है, उसे सामयिक, दूरदर्शी और राष्ट्रहित में माना जाना चाहिए। विरोधी दलों के नेता भले ही इसमें राजनीति के पुट तलाशें, जैसे कि राहुल गांधी ने सोना न खरीदने की अपील पर नाराजगी जताई है, लेकिन इस समय की जरूरत सोना नहीं बल्कि देश की अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ करने की सोच है।
देश की जनता इस बात को अच्छी तरह जानती है कि लगभग तीन वर्ष पहले जब रूस और यूक्रेन का युद्ध प्रारम्भ हुआ था, उसी समय से ईंधन संकट प्रारम्भ हो गया था। यह संकट लगभग 11 सप्ताह पूर्व 28 फरवरी को उस समय और गहरा हो गया, जब ईरान-इज़रायल युद्ध में अमेरिका कूद पड़ा और ईरान ने दुनिया के सबसे व्यस्त ईंधन मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को बंद कर दिया।
भारत ने ईरान से भी मधुर संबंध बनाए रखे और अमेरिका से भी मित्रता कायम रखी। इससे भारत ने एक तरफ रूस से सस्ता कच्चा तेल खरीदा, दूसरी तरफ भारत के तेल और गैस से भरे जहाज होर्मुज के रास्ते ही भारत पहुंच गए। इस बीच ऊर्जा संकट से पूरी दुनिया त्राहि-त्राहि करने लगी और इसकी आंच भारत तक भी पहुंची।
मोदी सरकार ने इस अभूतपूर्व ऊर्जा संकट में देश की जनता को संकट का सामना नहीं करने दिया। पूरी दुनिया में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतें आसमान पर पहुंच गईं, लेकिन भारत में चूल्हे भी जलते रहे और वाहन भी चलते रहे। हां, तेल और गैस के भंडार अब कम हो रहे हैं। इसलिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की जागरूक जनता से बहुत सामान्य सहयोग मांगा है। इससे सरकार को तैयारी का समय मिल जाएगा क्योंकि वैश्विक ऊर्जा संकट अभी समाप्त नहीं हुआ है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और महंगे ईंधन के बीच देशहित में एक अहम अपील की है। उन्होंने विदेशी मुद्रा बचाने के लिए एक साल तक सोना न खरीदने, खाने के तेल की खपत कम करने, अनावश्यक वाहन उपयोग घटाकर कारपूलिंग करने और विदेश यात्राएं टालने का आग्रह किया है।
प्रधानमंत्री ने कहा, देशभक्ति सिर्फ जान देना नहीं बल्कि मुश्किल वक्त में जिम्मेदारी से जीना भी है। प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल करने की अपील की। उन्होंने मेट्रो और कारपूल अपनाने पर जोर दिया।
पीएम मोदी ने वर्क फ्रॉम होम करने पर जोर दिया। इसके पीछे सीधा हिसाब है। दफ्तर आने-जाने में रोजाना लाखों लीटर पेट्रोल-डीजल जलता है। कॉर्पोरेट कंपनियां अगर सप्ताह में कुछ दिन भी वर्क फ्रॉम होम लागू करें तो ईंधन की खपत और आयात का बोझ दोनों कम हो सकते हैं।
पीएम ने नागरिकों से अपील की है कि वे गैर जरूरी विदेश यात्रा, विदेश में छुट्टियां मनाने और विदेशी शादियों से बचें तथा घरेलू पर्यटन और भारत के भीतर समारोह आयोजित करके विदेशी मुद्रा भंडार को संरक्षित करने में मदद करें।
पीएम मोदी ने लोगों से एक साल तक सोना न खरीदने की अपील की। भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोना खरीदने वाला देश है और हम हर साल करीब 59 अरब डॉलर यानी लगभग पांच लाख करोड़ रुपए का सोना बाहर से मंगाते हैं। सोने की कीमत और रुपए की कमजोरी के बीच सीधा रिश्ता है। सोना महंगा होता है तो रुपया और कमजोर होता है।
प्रधानमंत्री मोदी ने नागरिकों को मेड-इन-इंडिया और स्थानीय स्तर पर बनने वाले उत्पादों को प्राथमिकता देने के लिए प्रोत्साहित किया, जिनमें जूते, बैग और दैनिक उपयोग की वस्तुएं शामिल हैं। भारतीय सामान खरीदने से आयात कम होगा और देश के उद्योग तथा रोजगार को फायदा मिलेगा।
पीएम मोदी ने किसानों से अपील की कि वे रासायनिक खाद का उपयोग 50 प्रतिशत कम करें, प्राकृतिक खेती अपनाएं और डीजल पंप की जगह सौर पंप लगाएं। भारत यूरिया की अपनी जरूरत का 25 प्रतिशत, फॉस्फेट का 90 प्रतिशत और पोटाश का पूरा 100 प्रतिशत विदेश से मंगाता है।
2023-24 में सिर्फ उर्वरक सब्सिडी का बोझ 1.75 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया। यूरिया बनाने के लिए प्राकृतिक गैस चाहिए, जो खुद आयात होती है। पश्चिम एशिया संकट में गैस महंगी हुई तो खाद महंगी हुई और सरकार की सब्सिडी भी बढ़ी। खाद का इस्तेमाल कम करें तो यह पूरी श्रृंखला टूटती है।
वैश्विक ऊर्जा मार्ग स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से प्रतिदिन लगभग 2 करोड़ बैरल कच्चे तेल का परिवहन होता है। जहाजों का आवागमन बंद होने से इस वैश्विक संकट का प्रभाव अभूतपूर्व रहा। ब्रेंट क्रूड की कीमत 70 डॉलर से बढ़कर 126 डॉलर प्रति बैरल हो गई है।
इसके परिणामस्वरूप दुनिया के कई देशों को असाधारण कदम उठाने पड़े। बांग्लादेश में ईंधन की राशनिंग हुई। श्रीलंका में चार दिवसीय कार्य सप्ताह के साथ फ्यूल पास जारी किए गए हैं। दक्षिण कोरिया ने पहली बार ईंधन मूल्य सीमा तय की है। जापान को अपना सबसे बड़ा रणनीतिक तेल भंडार उपयोग करना पड़ रहा है।
इसके विपरीत भारत में कोई ईंधन राशनिंग नहीं हुई। देश भर में तेल और गैस की सुचारु आपूर्ति हो रही है। भारत भी अपने लगभग 88 प्रतिशत कच्चे तेल के आयात के लिए इसी मार्ग पर निर्भर रहता है। भारत का लगभग 40 प्रतिशत तेल आयात खाड़ी देशों से होता है। इस प्रकार हमारे देश को भी अभूतपूर्व ऊर्जा संकट का सामना करना पड़ा, लेकिन इस संकट का आर्थिक बोझ भारत सरकार ने स्वयं वहन किया।
पीएम मोदी ने जनता से अपना योगदान देने के लिए अपील की है, जो देशहित में है।















